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खुल जा ‘सिम-सिम’

कारोबार जरुर पढ़ें

खुल जा ‘सिम-सिम’

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  आम आदमी … भावना तो, कारपोरेट संभावना… पर ध्यान देता है।

ऐसे वक्त में जबकि देश में करोड़ों लोगों का रोजगार छिन गया है, इकोनॉमी सबसे बुरे दौर में चल रही है, चीन के साथ सरहद पर जंग के हालात हैं, आम आदमी कैमरे के सामने टीवी तोड़ रहा है, तब देशा की सबसे बड़ी 8 कंपनियों के एम कैप  यानी बाजार पूंजी में 1.76 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है।

बीते शुक्रवार को शेयर बाजार से खबर आई कि जब देश सुशांत सिंह राजपूत की मौत से गमगीन था, गलवान में बीस जांबाज सैनिकों की शहादत का शोक मना रहा था, उस हफ्ते में सेंसेक्स की टॉप 10 में से 8 कंपनियों के मार्केट कैप में 1,76,489.28 करोड़ का इजाफा हुआ।

सबसे ज्यादा फायदे में रही रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिसके मार्केट कैप में 1.08 लाख करोड़ का इजाफा हुआ। अब रिलायंस देश में 11 लाख करोड़ ($150 billion ) पूंजी वाली पहली कंपनी है, और इतनी बड़ी पूंजी वाली शायद दुनिया की पहली कर्ज मुक्त कंपनी है।  

 

कंपनीइजाफा (करोड़) बाजार पूंजी (करोड़)
RIL28,248.9711,43,667
HDFC27,788.225,67,093.60
ICICI12,729.162,35,648.10
Airtel6,301.173,11,757.83
Infosys5,771.093,00,543.95
Kotak Mahindra bank4,442.422,57,640.33
TCS3,133.247,68,131.91

ये इसलिए खास है, क्योंकि कोरोना और लॉकडाउन से बाजार की चिंता बढ़ी है। सोना 20 मई के बाद सबसे महंगे स्तर पर है। सोने के स्पॉट में 0.4%  और फ्यूचर में 0.6% उछाल इशारा है कि बाजार को  ग्लोबल इकोनॉमी के जल्द रिकवरी की उम्मीद नहीं है।

ये इसलिए खास है, क्योंकि अभी बाजार में सप्लाई है, डिमांड नहीं है,  पूंजी है, लेनदार नहीं। RBI के मुताबिक  7 जून तक खत्म हुए पखवाड़े में यानी 15 दिनों में बैंकों ने 96.51 लाख करोड़ कर्ज दिया, जबकि इसी दौरान 125.40  लाख करोड़ की डिपॉजिट ली।

ये इसलिए खास है क्योंकि देश की सबसे बड़ी 633 कंपनियों की आय में जनवरी-मार्च तिमाही में पिछले साल के मुकाबले 75.22% की कमी दर्ज की गई है।

ये इसलिए खास है क्योंकि बात सिर्फ 19 जून की करें तो NSE पर FIIs यानी Foreign institutional investors ने 1,237 करोड़ के शेयरों की खरीदारी की तो DIIs यानी domestic institutional investors ने 880.66 करोड़ के शेयरों की बिकवाली की। मतलब ये कि अभी हमारे शेयर बाजार पर हमारे देश के इन्वेस्टर को ही भरोसा नहीं है।

सवाल है ये हुआ कैसे ?

कारोबार की दुनिया का एक उसूल है –लौट कर सिर्फ यादें आती हैं, वक्त नहीं।  जब आम लोग कोरोना को आपदा मान रहे थे, रिलायंस जैसी कंपनियों ने इसमें अवसर देखा। कोरोना इकोनॉमी के लिए खुद को तैयार किया …तेल और सिम वाली कंपनी.. पीपीई बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गई। वैसे देखा जाए तो इन 8 कंपनियों की कामयाबी के पीछे कई परिकथा सी पटकथा है, नीति की राजनीति है , पहले सप्लाई फिर रिप्लाई का सपोर्ट सिस्टम है, चंदे वाले बंदे हैं, GST की भीषण व्यवस्था के विभीषण हैं, यूं ही नहीं खजाना किसी का इंतजार करता है कि कोई आए और बोले- खुल जा ‘सिम-सिम’   

लेकिन इन सबमें जो सबसे खास है वो है ये नंबर … देश की सामूहिक याद्दाश्त में बसा, सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ …जादुई नंबर …. 1.76 लाख करोड़..

ये वही रकम है जिसकी खोज इस देश में पहली बार विनोद राय ने की थी।  बतौर कैग उन्होंने देश को बताया था कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की रकम थी …1.76 लाख करोड़

सालों की सुनवाई के बाद सीबीआई कोर्ट ने हर आरोपी को ये कहते हुए बरी कर दिया कि इस मामले में एक भी…. फिर से सुनिए…. एक भी सबूत कोर्ट में पेश नहीं किया गया

वही विनोद राय जिन्होंने घोटालों को लेकर एक किताब लिखी … not just an accountant .. अब ये अलग .बात है कि 2012 में लखनऊ के अरविन्द शुक्ला की  RTI के जवाब से पता चला कि DOPT के पास से  केरल कैडर के इस 1972 बैच के खोजी IAS  का सर्विस रिकार्ड ही गुम हो गया है।

राय 2016 में पद्म भूषण से नवाजे गए, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई पैनल का मुखिया बनाया और उन्होंने BBB यानी Bank Board Bureau  का चीफ बनना भी कबूल किया। वो तब जबकि कैग पर केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी पद को कबूल करने पर संविधान की धारा 324(5) के तहत  रोक लगी है….गौर कीजिए ये रोक… सुप्रीम कोर्ट के जज या चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर नहीं है । अंबेडकर ने 30 मई 1949 को ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में कैग को संविधान का सबसे अहम अधिकारी माना था।

 1.76 लाख करोड़

ये वही रकम है जिसे सरप्लस बताकर… बिमल जालान कमेटी के सुझाव पर रिजर्व बैंक ने 26 अगस्त 2019 को अपने खाते से भारत सरकार के खाते में ट्रांसफर किया।

 जब-जब 1.76 लाख करोड़ की ये रकम सामने आई है, हर बार कोई दिलचस्प कहानी सामने आई है।

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