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कहां गए 12 करोड़ गैस सिलेंडर?

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कहां गए 12 करोड़ गैस सिलेंडर?

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गरीबों की बेहतरी के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं बनाती है, अगर ये योजनाएं जमीन पर उतर जाएं तो देश में न गरीब रहेंगे न कोई गरीब। लेकिन होता ये है कि इन योजनाओं को लागू करने मे कई तरह की खामियां सामने आती हैं, जिनका तेजी से निराकरण नहीं होता।

ताजा मिसाल है उज्जवला योजना (ujjwala scheme) का। जहां एक RTI से पता चला है कि 31 लाख गरीब महिलाओं को मुफ्त में गैस योजना का फायदा नहीं पहुंच पाया। वजह- बैंक खाते से जुड़ी परेशानियां जैसे अकाउन्ट का आधार से लिंक नहीं होना, KYC पूरा नहीं होना या फिर अकाउन्ट का बंद या निष्क्रिय होना। नतीजा ये हुआ कि सरकार DBT के जरिए इन खातों में जो रकम डालती है, वो 31 लाख खातों में जमा नहीं हुए। सरकार के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से जून के लिए उज्जवला योजना के 7.5 करोड़ लाभार्थियों के खाते में 9,670 करोड़ की रकम गई। लेकिन 31 लाख लाभार्थी सरकार की इस योजना से वंचित रह गए। ये तब है जबकि इस बाबत जानकारी मिलने के बाद सरकार ने तमाम एजेंसियों को तेजी लाने को कहा और तब 76.47 लाख महिलाओं से ये आंकड़ा घट कर 31 लाख पर आया है।

26 मार्च को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 8.03 करोड़ गरीब महिलाओं को अप्रैल से जून के लिए हर महीने एक मुफ्त सिलेंडर (cylinder) यानी कुल 24 करोड़ सिलेंडर देने का ऐलान किया था। अब  ministry of petroleum and natural gas से जारी हुए आंकड़े बताते हैं कि 24 करोड़ की जगह सिर्फ  12.64 करोड़ सिलेंडर ही गरीबों को मिले। यानी 12 करोड़ सिलेंडर (cylinder) का वितरण नहीं हो पाया।

31 लाख महिलाओं के साथ किसने की नाइंसाफी ?

गरीब महिलाओं के खाते में सिलेंडर के नाम पर रकम जमा करने की जिम्मेदारी OMC –यानी oil marketing companies  जैसे -— IOCL, HPCL और BPCL की थी। लेकिन इन कंपनियों ने खाते में कमियां गिना कर ये रकम ट्रांसफर नहीं की।

जुलाई में अंग्रेजी अखबार ET यानी the economic times ने RTI के तहत इन तीनों oil marketing companies  से पूछा था कि उज्जवला के जिन लाभार्थियों को बैंक खाते में रकम ट्रांसफर का लाभ मिला और जिन्हें नहीं मिला, उनकी तादाद बताएं। जवाब मिला कि इस साल 1 अप्रैल से 29 जून के बीच 76.47 लाख लाभार्थियों के खाते में रकम ट्रांसफर नहीं की जा सकी। इनमें सबसे बड़ी तादाद HPCL के लाभार्थियों की थी।

oil marketing companies  उज्जवला से वंचित लाभार्थीअवधि 2020
HPCL72.96 लाख1April  -27 June
IOCL2,58,7461April – 29July
BPCL92,3311April – 8August

एक सवाल ये है कि जब तेल कंपनियों के रिकॉर्ड में 76.47 लाख खातों की बात है तो तेल मंत्रालय का आंकड़ा सिर्फ 31 लाख खातों की बात क्यों कर रहा है?  जवाब ये है कि जब सरकार के संज्ञान मे ये बात आई तब कैबिनेट ने 8 जुलाई को इस योजना का सितंबर तक विस्तार किया ताकि वंचित लाभार्थियों को इसका फायदा मिल सके। सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी वंचितों तक इस योजना का लाभ पहुंच जाए।

ये कहानी सिर्फ गुम हुए 12 करोड़ गैस सिलेंडर की नहीं है।

26 March 2020 को वित्त मंत्री ने गरीबों के लिए 1.7 लाख करोड़ की योजना का ऐलान किया था।   इसमें सबसे अहम था

राशन कार्ड धारकों को National Food Security Act के तहत मुफ्त में राशन दिया जाना। PDS के तहत मिलने वाले अनाज को तीन महीने तक दोगुना किया जाना

बूढ़ों, विधवाओं और विकलांगों को दो किस्तों में 1000 रुपया पेंशन के तौर पर दिया जाना

जन धन योजना के तहत महिलाओं के खाते में तीन महीने के लिए हर माह 500 रुपया जमा किया जाना

 उज्जवला योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर दिया जाना

अब अगर उज्जवला योजना की तरह बैंक खाते से जुड़ी बाकी की योजनाओं की भी जांच की जाए तो पता चलेगा कि आधार कार्ड की वजह से लाभुकों को तीन तरह की परेशानियां हो रही हैं।

आधार ने किया निराधार

  1.  आधार नंबर से मिलान नहीं होने पर राशन कार्ड रद्द
  2. आधार कार्ड होने के बावजूद राशन कार्ड से लिंक करने की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर राशन कार्ड रद्द
  3.  आधार बेस्ड biometric authentication (ABBA) नहीं होने पर राशन कार्ड रद्द

गरीबों को राशन दुकान से अनाज मिलने की योजना तीन तरह की व्यवस्था पर चल रही है। झारखंड और राजस्थान में केंद्र सरकार के पसंद वाली ABBA-aadhar based biometric authentication – व्यवस्था लागू है। तमिलनाडु में ATM की तरह का non-biometric smart card की व्यवस्था है जबकि छत्तीसगढ़ में टेबलेट के जरिए लाभुकों की तस्वीर से पहचान कर राशन दिए जाने की व्यवस्था है। रिसर्च से पता चला है कि ABBA के मुकाबले स्मार्टकार्ड और टेबलेट वाली योजना ज्यादा लाभुकों तक पहुंच रही है।

सुझाव

  1. आधार जैसी तकनीक आधारित व्यवस्था गरीबों को सरकार की योजनाओं का लाभ लेने से रोक देती है। मनरेगा, पेंशन, गैस सिलेंडर के लिए DBT, महिलाओं के जन-धन खाते में 500 की मासिक जमा के लिए आधार को अनिवार्य न बना कर ऐच्छिक किया जाए
  2.  Aadhaar Payment Bridge System (APBS) की जगह  National Electronic Fund Transfer (NEFT)  को लागू करने पर गौर किया जाए
  3.  कुछ मामलों में देखा गया है कि कई गरीबों की LPG subsidy बगैर उनकी इजाजत लिए उनके एयरटेल वालेट में जमा हो गई। मोबाइल कंपनी ने ये खाते बगैर लाभुकों को बताए और उनकी इजाजत लिए ही खोल दिए थे।
  4. Barik 2020; Singh and Salve 2020 के रिसर्च से पता चला है कि 2017 और2018 में वृद्धावस्था पेंशन के 4% लाभुक तकनीकी वजहों से लाभ पाने से वंचित रह गए।
  5. नीति आयोग की एक स्टडी से पता चला है कि PMMVY में जो खाते आधार से लिंक थे उनमें से 28% मामलों में सरकार की ओर से दी गई रकम उन खातों में चली गई जो लाभुक ने दी ही नहीं थी। महिला और बाल विकास के 5,525 लाभुकों के सर्वे से पता चला कि महज 60% लाभुकों ने ही अपने खाते में PMMVY की रकम मिलने की पुष्टि की।

गरीबों के लिए बनी तमाम सरकारी योजनाओं में खुद को लाभुक साबित करने की जिम्मेदारी गरीब की होती है। अनपढ़ होने या सरकारी प्रक्रिया के जटिल होने की वजह से कई बार गरीब अपना हक हासिल करने से वंचित रह जा रहे हैं। इस व्यवस्था को ज्यादा मानवीय, ज्यादा संवेदनशील और कम कागजी होना चाहिए।

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