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शी जिनपिंग की कुरसी खतरे में

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शी जिनपिंग की कुरसी खतरे में

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If the free world doesn’t change Communist China, Pompeo warned, “Communist China will surely change us.”

President Xi is “a true believer in a bankrupt totalitarian ideology.”

Mike Pompeo, secretary of state USA

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो के निक्सन लाइब्रेरी भाषण को अमेरिका चीन संबंध के नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है। 22 फरवरी 1946 के दिन मॉस्को में अमेरिका के charge d’affaires George Kennan के 8000 शब्दों वाले telegram को रुस और अमेरिका के बीच शीतयुद्ध की शुरूआत माना जाता है। अब  पॉम्पियो के निक्सन एड्रेस को शीत युद्ध 2 की शुरूआत माना जा रहा है।

रोनाल्ड रीगन ने अमेरिका –रुस रिश्ते को परिभाषित करते हुए कहा था -“trust but verify. अब पॉम्पियो का चीन के लिए मंत्र है-“distrust and verify”.

Pompeo Criticizes ‘Totalitarian’ China in Nixon Library Speech as Tensions Spike

बीते पचास साल में पहली बार अमेरिकी सरकार ने चीन की सरकार को हटाने के लिए चीन की जनता का सार्वजनिक तौर पर आह्वान किया है। तो क्या शी की गद्दी जाने वाली है?

बीते एक महीने में चीन के खिलाफ बेहद सख्त रुख का इजहार  अमेरिका के national security adviser Robert O’Brien, Attorney General William Barr और FBI Director Christopher Wray भी कर चुके हैं।

इस बयान का असर क्या होगा ?

ये कहा जा रहा है कि पॉम्पियो के बयान से चीन में लोकतंत्र को कोई मदद नहीं मिलेगी, उल्टे शी इस बयान का इस्तेमाल अपने विरोधियों को अमेरिका के एजेंट करार दे कर कुचलने के लिए करेंगे।

चीन की ओर से पॉम्पियो के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। ग्लोबल टाइम्स में इसकी मुखालफत मे लेख छपा..तो चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Hua Chunying ने इसका मखौल उड़ाते हुए ट्वीट किया कि चींटी कुछ भी कर ले, वो पेड़ को नहीं हिला सकती।

Zhang Shuhua ,Director of the Institute of Information Studies at the Chinese Academy of Social Sciences ने ग्लोबल टाइम्स में लिखा –

US politicians think they can achieve their goal through attacking the CPC. They overestimate themselves. They try to alienate the people from the CPC like ants trying to shake a big tree. They underestimate the solidarity and cohesion of Chinese society. The CPC now has over 93 million members from the people. It is the backbone of China’s huge society and the main force that is bolstering operation of the society. The destiny of the Party and the country has always been closely linked. 

 बात तख्ता पलट की हो तो  अमेरिका को इसमें महारत हासिल है। ईरान , क्यूबा, इंडोनेशिया में सुकरणो  को हटाकर जनरल सुहार्तो को गद्दी पर बिठाना। पनामा, होंडुरास, निकारागुआ, मेक्सिको, हैती…अमेरिका के लिए ये जैसे पसंदीदा खेल रहा है। एक रिसर्च के मुताबिक 1946-2000 के बीच अमेरिका ने CIA के जरिए तख्ता पलट की 81 कोशिशों को अंजाम दिया। 

अब बड़ी खबर जो छन कर आ रही है वो ये कि CIA को ये जानकारी मिली है कि चीन में सत्ता पलट की स्थिति बन रही है। पोलितब्यूरो की सर्वोच्च संस्था PSC यानी पोलितब्यूरो स्टैन्डिंग कमेटी के Iron Triangle– Xi Jinping, Yu Zhengsheng और Wang Qishan के रिश्ते में दरार आ गई है। जियांग इसी कोर ऑफ द कोर ग्रुप के जरिए चीन की सत्ता पर नियंत्रण रखते आए हैं। अब सीआईए को पता चला है कि शी के पॉलिटिकल और लीगल कमेटी पर कब्जा करने से उनके गुरु Jiang Zemin नाखुश बताए जा रहे हैं। अभी PSC के सात मेंबर में 6 Jiang Zemin के समर्थक हैं तो एक Li Keqiang Hu Jintao के समर्थक हैं।

CIA के DDI यानी Directorate of Digital Innovation में चीन डेस्क पर  काम कर रहे Digital targeters और Source collection officers  को चीन के डिजीटल वर्ल्ड की स्कैनिंग से पता चला है कि शी के खिलाफ 25 मेंबर पोलितब्यूरो कमेटी में भी बड़ा जनमत तैयार हो चुका है। CIA की दूसरी शाखा DA यानी DIRECTORATE OF ANALYSIS पर अलग-अलग स्रोतों से आने वाली खुफिया जानकारी का विश्लेषण कर अमेरिकी सरकार को देने की जिम्मेदारी है। DA में काम कर रहे Targeting Analysts और Analytic Methodologists की खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल 27 दिसंबर को जिस तरह 25 मेंबर वाले पोलितब्यूरो को एक तरह से धमका कर शी ने खुद को माओ वाली पदवी “people’s leader दिलवा ली, उससे Hu Jintao बेहद नाराज हुए। हू स्टैंडिंग कमेटी में जेमिन से कमजोर हैं, लेकिन 25 मेंबर वाले पोलितब्यूरो में उनके गुट का दबदबा बताया जाता है। बाकी दुनिया के लिए जहां शी चीन के डिक्टेटेर की तरह नजर आते हैं, वहीं चीन में असलियत से वाकिफ लोग मानते हैं कि सरकार को दरअसल जियांग जेमिन और हू जिन्ताओ मिल कर उसी तरह आज भी चला रहे हैं जैसे कभी माओ या देंग चलाया करते थे। अब ऐसा लग रहा है कि जिंयाग और हू दोनों शी के बढ़ते कद को कम करने के हाथ मिला चुके हैं।

शी जिनपिंग 1993 में फूजियान में एक स्कूल का निरीक्षण करते हए

शी तख्तापलट के खतरे से वाकिफ हैं। जब उनके पिता Xi Zhongxun के माओ से रिश्ते खराब हुए तो शी के परिवार को माओ के गद्दार करार दिया गया…और शी के परिवार को जिल्लत और किल्लत से दो चार होना पड़ा । ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इस लिए शी ने बीते 8 सालों में सीपीसी के तीन हजार सदस्यों को मालामाल कर दिया। एक स्रोत के मुताबिक सीपीसी मेंबरान की कुल आय 470 बिलियन $ और हर मेंबर की औसत आय 160 मिलियन $ यानी करीब हजार करोड़ रुपये है। लेकिन अभी पोलितब्यूरो की स्टैंडिंग कमेटी के 6 मेंबर जिन पिंग को हटाना चाहते हैं।Wang Yang और Li Keqiang खतरा उठा कर भी जिन पिंग से अलग नजर आने की कोशिश कर रहे हैं।

माओ के समय ज्यादातर CCP नेता हुनान और हुबेई से थे, देंग श्याओ पिंग ने सिचुआन से अपने भरोसमंद लोगों को इसमें जगह दी, Jiang Zemin और Hu Jintao के समय जियांग्सू और शैनदांग राज्यों से ज्यादा प्रतिनिधि सेंट्रल कमेटी में लिए गए। आज भी चीनी सेना में शैनदांग और प्रशासन में जियांग्सू का बोलबाला है। शी ने धीरे-धीरे अपने इलाकै यानी Shaanxi (陕西情结 से अपने भरोसमंद साथियों को पोलितब्यूरो में शामिल कर लिया। सीआईए के मुताबिक अभी सर्वोच्च संस्था PSC के 7 में से 3 शांक्सी गुट से हैं। पोलितब्यूरो के 25 में से 8 और CMC यानी सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के 34 में से 11 शांक्सी गुट के हैं।

सारी दुनिया सोच रही है कि चीन इस साल नवंबर में ट्रंप के हटने और बाइडेन के आने का इंतजार कर रहा है, लेकिन खबर ये है कि अमेरिका से पहले चीन में हो सकता है सत्ता परिवर्तन…और पॉम्पियो, शी के खिलाफ चीन में लगी चिंगारी में बस थोड़ा पेट्रोल डाल रहे हैं।

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